देहरादून: उत्तराखंड में मानसून में कम बारिश के कारण नदियों के प्रवाह और जलविद्युत उत्पादन में आई कमी से बिजली का संकट गहरा गया है। जिससे प्रदेश भर में 35 मिनट से लेकर 15 घंटे तक की बिजली कटौती लागू कर दी गई है। इसका सबसे बड़ा असर भारी उद्योगों पर हुआ है। कुमाऊं और गढ़वाल के भारी उद्योगों को 21-22 सितंबर को 15 घंटे तक सबसे लंबी कटौती का सामना करना पड़ा, जबकि हल्द्वानी में सबसे कम 35 मिनट की कटौती दर्ज की गई।
UPCL के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने कहा कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड इस सितंबर में पिछले साल की तुलना में कम बिजली पैदा हुई है। उन्होंने कहा पिछले साल सितंबर में पीक आवर्स के दौरान उत्पादन 1094 मेगावाट था, जो नदियों का प्रवाह घटने के कारण इस साल घटकर 912 मेगावाट रह गया है। उन्होंने औसतन 170 मेगावाट की कमी का अनुमान जताया।
UPCL ने उत्तराखंड में 48 मिलियन यूनिट की आपूर्ति के मुकाबले बिजली की मांग 53 मिलियन यूनिट बताई है, इस वजह से कटौती करनी पड़ रही है। दैनिक बेस लोड आवश्यकता लगभग 2700 मेगावाट है, जिसमें से 1000 मेगावाट की आपूर्ति राज्य के स्वामित्व वाले जलविद्युत प्रोजेक्ट से की जाती है। केंद्रीय ग्रिड से आपूर्ति में भी गिरावट आई है।
पीसी ध्यानी ने कहा कि पीक आवर्स आवंटन पिछले सितंबर के 426 मेगावाट से घटकर इस साल 338 मेगावाट रह गया, जबकि टीएचडीसी की टिहरी गढ़वाल जलविद्युत परियोजना की दो इकाइयां तकनीकी समस्याओं के कारण बंद रहीं, जिससे लगभग 100 मेगावाट की आपूर्ति प्रभावित हुई। 19 सितंबर से UPCL ने उपभोक्ता श्रेणी के अनुसार कटौती को अलग-अलग समय में बांट दिया है। आगामी त्योहारी मांग और हरिद्वार अर्धकुंभ को देखते हुए UPCL ने केंद्रीय ग्रिड से अतिरिक्त आपूर्ति मांगी है। यूपीसीएल एक्सचेंज में लगातार बिजली खरीद रहा है। केंद्र से अलग-अलग महीनों में 100-400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मांगी गई है।