देहरादून: पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हरिद्वार से खुलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताकर सबको चौंका दिया है। बता दें कि हरीश रावत ने इससे पहले कहा था कि वे अब उम्र के ऐसे पड़ाव में है कि चुनाव लड़ेंगे नहीं लड़ाऐंगे। लेकिन दिल्ली से लंबे समय बाद लौटते ही हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है।
खासकर कांग्रेस के अंदर अब एक बार फिर नई बहस शुरू होने जा रही है। हरदा के इस नए सियासी दांव से कांग्रेस के अंदर संग्राम होना तय है। हरीश रावत हरिद्वार सीट से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। अब वे हरिद्वार से विधायक का चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं। बता दें कि हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से विधायक हैं।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा है कि 'उम्र बढ़ रही है, मगर हरिद्वार के साथ मेरा रोमांस भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2009 से 2014 के उस हिस्से तक जब मैं लोकसभा में हरिद्वार का प्रतिनिधित्व करता था, मेरे जीवन का स्वर्णिम काल था। मतदाता और प्रतिनिधि के रूप में हम एक-दूसरे में इतने घुल-मिल गए थे, जिस प्रकार दूध में चीनी और छाछ में पानी मिलने के बाद उसको अलग पहचानना कठिन होता है। हम एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे। सैकड़ों घरों से मेरा व्यक्तिगत, पारिवारिक रिश्ता बना जो आज भी कायम है। हजारों-हजार भाई-बहनों से प्रेम, सौहार्द और कर्तव्य के रिश्ते बने, जो आज भी जारी हैं।'
हरदा लिखते हैं कि 'मेरे दिल में एक इच्छा सी उठ रही है कि क्या मैं एक बार हरिद्वार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता? मैं एक बार विधानसभा को हरिद्वारमय करना चाहता हूं। बहुत सारी सोच, प्लानिंग मेरे मन में हरिद्वार के लिए हैं। मैं उत्तराखंड का संबल, उत्तराखंड का पिलर, हरिद्वार का निर्माण करना चाहता हूँ। लोग भी चाहते हैं। सोलानी के इस पार के लोगों के मन में यह बलवती भावना है कि हम एक बार हरिद्वार से एक बार हरीश रावत को विधानसभा में भेजें।
हरीश रावत ने आगे लिखा है कि 'जब मैं राज्य के सामने समग्र सवालों को, जिसमें पार्टी के आंतरिक सवाल भी सम्मिलित हैं, ध्यान में लाता हूं और विवेचन करता हूं तो मुझे अपनी भावना दबानी पड़ती है, लेकिन मैं इतना तो कर सकता हूँ कि हरिद्वार से इस बार फिर एक सुदृढ़, विवेकशील, समन्वयकारी, सबको मिलाकर चलने वाला नेतृत्व विधानसभा में पहुंच सके। मगर यह तय है कि जब तक मुझ में सांस है, 'पत्रं पुष्पं' की तरह ही सही मैं हरिद्वार की सेवा करता रहूंगा और अल्मोड़ा को ध्यान में रख करके करूंगा, कोई चीज छिपा करके नहीं। वैसे भी मेरा प्यार छिपा हुआ प्यार नहीं था, खुल्लम-खुल्ला प्यार था, वह यथावत खुल्लम-खुल्ला रहेगा।'
हरदा की पोस्ट से साफ है कि वे हरिद्वार से चुनाव लड़ना चाहते हैं, अगर मौका नहीं मिला तो अपने चहेते चेहरे के लिए टिकट मांग सकते हैं। जिसका असर आने वाले दिनों में हरिद्वार समेत पूरे प्रदेश की राजनीति में देखने को मिल सकता है।