लखनऊ: राजस्थान नगर निकाय चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को बड़ी सफलता नहीं मिल सकी। पार्टी महज 19 सीटों पर जीत दर्ज कर पाने में सफलता हासिल कर पाई। 309 नगर निकायों में हुए आम चुनाव में 10,244 वार्ड में वोट डाले गए थे। इसमें बहुजन समाज पार्टी महज 19 वार्ड में काउंसलर को जीत दर्ज कराने में कामयाब हो सकी। राजस्थान नगर निकाय चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में भारतीय जनता पार्टी उभरी। भाजपा ने 4179 सीटों पर जीत दर्ज कर पाने में सफलता हासिल की। वहीं, कांग्रेस को 3613 सीटें मिली। निर्दलीय 2273 सीटों पर जीत दर्ज कर पाने में कामयाब रहे।
राजस्थान नगर निकाय चुनाव रिजल्ट में आरएलपी ने भी 63 सीटों पर जीत दर्ज की। देश में लगातार सिमटती दिख रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने राजस्थान नगर निकाय चुनाव में 38 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह बहुजन समाज पार्टी को मिली सीटों से दोगुनी है। इसको लेकर अब चर्चा का बाजार गरमा गया है। दरअसल, बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान नगर निकाय चुनाव के रिजल्ट के बाद पार्टी को बधाई दी है।
मायावती ने जीते उम्मीदवारों का उत्साह बढ़ाते हुए बढ़ाई दी। साथ ही, उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े किए। लेकिन, 19 सीटों पर जीत के बाद जिस तरह से उनका बधाई संदेश आया है, सवाल उसी पर हो रहा है कि क्या मायावती लगातार पार्टी के गिरते प्रदर्शन के बाद अब इस प्रकार मिली सीटों पर संतुष्ट हैं?
बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन 2012 में उत्तर प्रदेश में सरकार जाने के बाद से लगातार बिगड़ा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी खाता खोलने में भी कामयाब नहीं हो पाई थी। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा। इन दोनों चुनाव में यूपी के राजनीतिक मैदान में मोदी लहर चरम पर था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने सपा के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतारे। पार्टी को 10 लोकसभा सीटों पर जीत मिली। हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन अधिक दिनों तक नहीं चला। सपा और बसपा की राहें अलग हो गईं।
लोकसभा चुनाव 2019 के बाद पार्टी का आधार दलित वोट बैंक भी खिसकता दिखने लगा। कभी 22 से 25 फीसदी वोट शेयर की राजनीति करने वाली मायावती अब उत्तर प्रदेश में महज 10 फीसदी वोट शेयर पर अटकती दिख रही हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में एक बार फिर पार्टी को निराशा हाथ लगी, जब कोई उम्मीदवार जीत दर्ज करने में कामयाब नहीं रहा। ऐसे में राजस्थान नगर निकाय चुनाव में बसपा प्रमुख मायावती के बयान की चर्चा राजनीतिक महकमे में खूब हो रही है।
बहुजन समाज पार्टी पिछले दिनों लगातार चर्चा में रही है। चर्चा की वजह पार्टी के अंदरूनी राजनीति है। मायावती ने लगातार अपने आप को पार्टी में मजबूत दिखाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। इस क्रम में उन्होंने एक बार फिर भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके अलावा अपने पूर्व सहयोगी और आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को भी पार्टी से निकल बाहर किया। छोटे भाई आनंद कुमार को वे बेटों को राजनीति में न लाने के निर्देश देती दिखी हैं।
बसपा प्रमुख कैडर के बीच परिवारवाद से अलग राजनीति का संदेश देती दिखी हैं। इसके बाद भी पार्टी के प्रदर्शन में सुधार न होना कैडर के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बसपा अब देश के अन्य भागों में दलित वर्ग के बीच अपनी पकड़ को उस स्तर पर बनाए रखने में कामयाब नहीं होती दिख रही है।