मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी के एकमात्र एमपीजी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव को लेकर शुक्रवार को माहौल उस समय गरमा गया, जब नामांकन पत्रों की जांच के दौरान एबीवीपी के उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त कर दिए गए। कार्रवाई के बाद एनएसयूआई समेत विभिन्न छात्र संगठनों ने कॉलेज परिसर में जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
देखते ही देखते छात्र नेता आमने-सामने आ गए और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विवाद बढ़ता देख कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल छात्रसंघ चुनाव को होल्ड कर दिया है। प्राचार्य डॉ. सुनील पवार ने बताया कि पूरे घटनाक्रम से विश्वविद्यालय के कुलपति को ई-मेल के माध्यम से अवगत कराया गया है। अब विश्वविद्यालय से मिलने वाले निर्णय के बाद ही चुनाव प्रक्रिया को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के लिए नामांकन के बाद शुक्रवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच की गई। इसी दौरान एबीवीपी से उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के नामांकन में नियमों से संबंधित आपत्तियां सामने आईं। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच चुनाव नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई।
बताया गया कि उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी की उम्र निर्धारित सीमा से अधिक होने को लेकर आपत्ति सामने आई। वहीं, सचिव और कोषाध्यक्ष पद के नामांकन में दस्तावेजों और क्रेडिट बेस्ड सिस्टम से संबंधित कमियां बताई गईं। इन्हीं आधारों पर तीनों नामांकन निरस्त किए गए। नामांकन निरस्त होने की सूचना के बाद एबीवीपी से जुड़े छात्र नेताओं में नाराजगी दिखाई दी, जबकि दूसरी ओर एनएसयूआई सहित अन्य छात्र संगठनों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया।
एनएसयूआई ने नामांकन निरस्त किए जाने की कार्रवाई को लेकर कॉलेज प्रशासन पर सवाल खड़े किए। संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया में भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं का राजनीतिक हस्तक्षेप है और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। एनएसयूआई के चुनाव प्रभारी सूरज रावत ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों और निर्धारित नियमों के अनुसार निष्पक्ष तरीके से कराया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि राजनीतिक दबाव में चुनाव निरस्त करने या प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया तो एनएसयूआई आंदोलन करेगी। उन्होंने आंदोलन को लेकर आत्मदाह जैसी गंभीर चेतावनी भी दी और इसकी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन पर डालने की बात कही। हालांकि, कॉलेज प्रशासन की ओर से नामांकन जांच में किसी राजनीतिक दबाव की पुष्टि नहीं की गई है।
एमपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील पवार ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार कराई जा रही थी। छात्रों के बीच चुनाव को लेकर उत्पन्न विरोध की स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति को पूरे मामले से अवगत कराया गया है। फिलहाल चुनाव प्रक्रिया को होल्ड कर दिया गया है और विश्वविद्यालय से मिलने वाले निर्देश के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एमपीजी कॉलेज की अपनी वेबसाइट पर भी छात्रसंघ चुनाव को कॉलेज स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और छात्रों को प्रतिनिधि चुनने का अवसर देने वाली व्यवस्था के रूप में वर्णित किया गया है। अब सबकी नजर विश्वविद्यालय के निर्णय पर है। एक ओर छात्र संगठन चुनाव को लेकर मैदान में उतर चुके हैं तो वहीं दूसरी ओर नामांकन निरस्त होने के बाद पैदा हुए विवाद ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है। ऐसे में विश्वविद्यालय का अगला फैसला ही तय करेगा कि एमपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव किस रूप में और कब आगे बढ़ेगा।