देहरादून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (83) को सोमवार को पद्मभूषण से सम्मानित किया। उनको यह सम्मान शिक्षा, सामाजिक जीवन, पत्रकारिता और सार्वजनिक सेवा में लंबे योगदान के लिए दिया गया है।
भगत कोश्यारी उत्तराखंड के बागेश्वर के दूरस्थ गांव से निकलकर शिक्षा, समाज सेवा और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में स्कूल खोलने से लेकर प्रदेश के मुद्दों को संसद में उठाया।
भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में हुआ था। सीमित संसाधनों में उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा माध्यम बनाया। 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी लिटरेचर में एमए किया। इसके बाद यूपी के एटा जिले में लेक्चरर के रूप में करियर की शुरुआत की। 1966 में पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिले में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। साथ ही विवेकानंद इंटर कॉलेज की भी शुरुआत की।
उन्होंने पत्रकारितता के जरिए लोगों को जागरूक करने का काम किया। पिथौरागढ़ में हिंदी साप्ताहिक पात्रिका पर्वत पीयूष का प्रकाशन शुरू किया। 1997 में भगत कोश्यारी यूपी विधान परिषद के सदस्य बने। उत्तराखंड राज्य के गठन में पहली सरकार में मंत्री बने। वह राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री रहे। 2008 में राज्यसभा सांसद बने। 2014 में नैनीताल-उधम सिंह नगर सीट से लोकसभा सांसद चुने गए। 5 सितंबर 2019 को महाराष्ट्र के 22वें राज्यपाल बने। अगस्त 2020 में गोवा के अतिरिक्त राज्यपाल का कार्यभार संभाला।