देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि, इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से नौ महिला कैडेट्स का पास आउट होना मिलिट्री एकेडमी के इतिहास में एक अहम मोड़ है और यह देश के महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
द्रौपदी मुर्मू ने आईएमए में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, 'यह आईएमए के इतिहास में एक अहम मोड़ है। यह न केवल भारत के रक्षा बलों के इतिहास में एक मील का पत्थर है, बल्कि भारत के महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ने का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है। मुझे यकीन है कि और भी कई महिला कैडेट एकेडमी में शामिल होंगी।'
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस मौके पर परेड का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा, 'यह एकेडमी सम्मान, साहस और देश की निस्वार्थ सेवा का एक शानदार प्रतीक है। कई असाधारण सैन्य लीडर, जिन्होंने सबसे मुश्किल हालात में हमारी सीमाओं की रक्षा की और भारत की गरिमा बनाए रखी, इसी एकेडमी से पास आउट हुए हैं। मुझे इस प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़े अतीत और वर्तमान के सभी लोगों की सराहना करने का यह मौका मिला है।'
उन्होंने देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सभी ऑफिसर कैडेटों को बधाई दी। उन्होंने कहा, 'मैं आपके परिवार के उन सदस्यों को भी बधाई देती हूं जिन्होंने आपकी उपलब्धियों में योगदान दिया है। मैं इंडियन मिलिट्री एकेडमी के कमांडेंट, इंस्ट्रक्टर और स्टाफ़ की तारीफ करती हूं कि उन्होंने ऑफिसर कैडेटों को गाइड करने में अथक प्रयास किए हैं।' उन्होंने कहा, 'आपके देशों ने हमें आपको मिलिट्री प्रोफेशनलिज़्म के उच्चतम स्तर तक प्रशिक्षित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। मुझे भरोसा है कि आप अपनी सेवा और यहां सीखे गए मूल्यों के ज़रिए अपनी सेनाओं और देशों का नाम रोशन करेंगे।'
उन्होंने कहा, 'यहां विदेशी कैडेटों की मौजूदगी दुनिया भर के देशों के साथ दोस्ती, सहयोग और शांतिपूर्ण संबंध बनाने के भारत के संकल्प को दर्शाती है। यहां कैडेट आपसी भरोसा, समझ और प्रोफेशनल संबंध विकसित करते हैं जो देशों के बीच रक्षा सहयोग को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। मुझे भरोसा है कि यहां मिले मूल्यों और प्रशिक्षण के दम पर वे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति में योगदान देंगे।'
ऑफिसर कैडेट्स को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा, 'इंडियन मिलिट्री एकेडमी में आपका सफर अनुशासन, त्याग और दृढ़ता का रहा है। आपने सीखा है कि मिलिट्री लीडरशिप का मतलब सिर्फ़ कमांड देना नहीं, बल्कि चरित्र, करुणा और प्रतिबद्धता भी है। आप हमारे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं। आप 140 करोड़ से ज्यादा नागरिकों के पवित्र भरोसे को लेकर चल रहे हैं। आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि सेवा ही सबसे बड़ा कर्तव्य है।'
उन्होंने कहा, 'तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक माहौल के दौर में भारतीय सेना को हालात के अनुसार ढलने और भविष्य के लिए तैयार रहने की जरूरत है। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि आप जीवन भर सीखते रहें, हिम्मत से फैसले लेने वाले और नैतिक लीडर बनें।'
उन्होंने कहा, 'सेना के ऑफिसर के तौर पर आप सैनिकों का नेतृत्व करने, उन्हें गाइड करने और उनकी देखभाल करने के लिए जिम्मेदार होंगे। आपको मिसाल बनकर नेतृत्व करना होगा, भरोसा जगाना होगा और टीमवर्क और समर्पण की भावना को बढ़ावा देना होगा। ऑपरेशनल प्रभावशीलता और अपने सैनिकों की भलाई के बीच संतुलन बनाकर, आप भरोसा कायम करेंगे और जिन यूनिट्स का नेतृत्व करेंगे, उनकी लड़ने की क्षमता को मज़बूत करेंगे। मुझे उम्मीद है कि आप आगे बढ़कर नेतृत्व करेंगे, अपने सैनिकों का ख्याल रखेंगे और हमारी सेनाओं की बेहतरीन परंपराओं को बनाए रखेंगे।'
देश में महिलाओं को पहली बार सन 1992 में 'वुमन स्पेशल एंट्री स्कीम' के तहत अधिकारी के तौर पर सेना में शामिल किया गया था। समय के साथ सेना की विभिन्न शाखाओं में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। बाद में हुए नीतिगत सुधारों और कोर्ट के अहम फैसलों ने महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन और कमांड के मौकों सहित नए रास्ते खोले।
सन 2021 में एक अहम मोड़ आया जब सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की परीक्षा में बैठने की इजाज़त दी। अगले साल महिलाओं का पहला बैच एनडीए में शामिल हुआ, जिससे सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में महिलाओं की और ज्यादा भागीदारी का रास्ता खुला। सन 2025 में 17 महिला कैडेट एनडीए से पास आउट हुईं, और अब सेना के लिए प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग के बाद नौ कैडेट आईएमए से पास आउट हुई हैं।