देहरादून : शूटर जसपाल राणा का 49 साल में निधन हो गया। जो कि भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते हैं। भारतीय शूटिंग को जसपाल राणा ने नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शूटिंग में अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित जसपाल राणा खिलाड़ी के साथ गुरु भी थे।
जसपाल राणा ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए देहरादून के पौंधा-मझौन क्षेत्र में राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स खोला। उनकी शूटिंग रेंज में कई युवा निशानेबाजों ने शूटिंग की बारीकी सीखी।
जसपाल राणा को जब भी समय मिलता खुद भी वे केंद्र में निशानेबाजों को प्रशिक्षण देने आते रहे हैं। उनके जाने के बाद भी शूटिंग रेंज नए शूटर को तरासने और तैयार करने का काम करता रहेगा। देहरादून के खेल जगत में यह शूटिंग रेंज नई पहचान बना चुकी है। प्रदेश के अनेक युवा निशानेबाजों ने यहीं से प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते।
पेरिस ओलंपिक 2024 भारत के लिए मेडल जीतने वाली शूटर मनु भाकर के गुरु जसपाल राणा ही थे। मनु ने ओलंपिक शुरू होने से पहले करीब डेढ़ महीने तक देहरादून के पौंधा स्थित जसपाल राणा निशानेबाजी संस्थान में बनी शूटिंग रेंज में ट्रेनिंग ली। मनु को जसपाल राणा ने प्रशिक्षण दिया। मनु प्रशिक्षण के लिए अक्सर देहरादून आती थीं। जसपाल राणा मनु के व्यक्तिगत कोच थे।
जसपाल राणा ने शूटिंग के गुर अपने पिता नारायण सिंह राणा से सीखे। नारायण सिंह राणा ही जसपाल राणा के पहले कोच रहे। नारायण सिंह शूटिंग क्षेत्र में कई सम्मान हासिल करने के साथ ही उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी रह चुके हैं। नारायण सिंह राणा के तीनों बच्चे जसपाल राणा, सुभाष राणा और सुषमा राणा निशानेबाजी (शूटिंग) के क्षेत्र में नाम कमा चुके हैं। खास बात ये है कि नारायण, जसपाल और सुभाष तीनों को द्रोणाचार्य पुरस्कार मिल चुका है। देहरादून के पौंधा-मझौन क्षेत्र में शूटिंग रेज को नारायण सिंह राणा की देखरेख में चलाया जा रहा है।