उत्तराखंड के देहरादून में निवेशकों की रकम डकार कर अपराधी बने दीपक मित्तल पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। दीपक मित्तल की पत्नी राखी को दुबई में गिरफ्तार किया गया है। वहीं, रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों की गाढ़ी कमाई डकारने वाले भगोड़ा निदेशक दीपक मित्तल के आपराधिक इतिहास को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। वह केवल डिफाल्टर बिल्डर ही नहीं है, वह लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा है। उसके खिलाफ पुलिस पहले ही गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर चुकी है। ऐसे में अब उत्तराखंड में मामले की चर्चा हो रही है।
दीपक मित्तल का नाम वर्ष 2022 में तेजी से उछला। उस समय उसने प्रॉपर्टी के धंधे में अपना सिंडिकेट बनाया। दीपक मित्तल ने अपने करीबियों को भी ठगी का शिकार बनाया। थाना राजपुर में उसके खिलाफ उसके ही बिजनेस पार्टनर के बेटे आर्यन वालिया ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का एक अलग केस दर्ज कराया था। दीपक पर आरोप है कि उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश के तहत कंपनी के बैंक खातों से करोड़ों रुपये अपने निजी खातों में ट्रांसफर कराए।
दीपक पर आरोप है कि उसने फर्जी ट्रांजेक्शन दिखाकर संपत्तियां खरीदीं। उसने पुष्पांजलि इंफ्राटेक कंपनी के बैनर तले आर्किड पार्क प्रोजेक्ट में करोड़ों की ठगी थी। इसी मामले में उसे फरार घोषित किया गया। वहीं, पत्नी राखी को दुबई से गिरफ्तार किया गया है।
मामले की एसआईटी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि विदेश भागने से ठीक पहले दीपक मित्तल ने बेहद शातिराना ढंग से अपनी कई बेनामी और मुख्य संपत्तियों को अपने रिश्तेदारों एवं करीबियों को बेच दिया। उसने एस्क्रो अकाउंट के नाम पर भी निवेशकों को झांसे में लिया। इस पूरी हेराफेरी का मकसद पूंजी को ठिकाने लगाना था।
दीपक मित्तल की साजिश यह थी कि कानूनी शिकंजा कसने पर उसकी संपत्ति से रिकवरी न हो सके। एसआईटी अभी उसकी इन सभी संदिग्ध संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और बैंक ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।
देहरादून में सामने आया बहुचर्चित फ्लैट घोटाला सामने आया था। दरअसल, राजधानी देहरादून के सहस्रधारा रोड पर ऑर्किड पार्क नाम से एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। इस परियोजना को पुष्पांजलि इंफ्राटेक कंपनी की ओर से विकसित किया जा रहा था। इसके संचालक दीपक मित्तल और उनकी पत्नी राखी मित्तल थे। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक लोकेशन के साथ पेश किया गया। प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किया।
प्रोजेक्ट में करीब 90 खरीदारों ने अपने जीवन की जमा-पूंजी लगा दी। समय बीतने के साथ निर्माण कार्य धीमा हो गया। अंत में प्रोजेक्ट पूरी तरह से रुक गया। निवेशकों को किए गए वादे पूरे नहीं किए गए। लोगों ने मामला दर्ज कराया। जांच में सामने आया कि इस प्रोजेक्ट के नाम पर करीब 45 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। वर्ष 2018 के बाद निर्माण कार्य लगभग ठप हो गया।
प्रोजेक्ट के निवेशकों को इसके बाद भी आश्वासन दिए जाते रहे। घर का सपना दिखाया जाता रहा। इसके पीछे दीपक मित्तल कर प्लानिंग निवेशकों का पैसा लेकर भागने की थी। मामले में केस दर्ज किए जाने के बाद दीपक मित्तल और राखी मित्तल की जांच शुरू हुई। दोनों को पकड़ने का प्रयास शुरू हुआ। अब लंबे समय बाद आरोपी राखी मित्तल की दुबई में गिरफ्तारी ने इस मामले में निवेशकों को नई उम्मीद जगा दी है। उत्तराखंड पुलिस राखी को भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया में जुट चुकी है।