देहरादून: उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी की तैयारियां राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर जोनस्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर के अंदर किए जाने का मामला गरमा गया है। आरोप है कि यह सब वन अधिकारियों की अनुमति के बिना किया गया, जिससे वन और वन्यजीव नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शनिवार को एक बड़े सेटअप के लिए सामान लाया गया। इसमें एक पंडाल, एक स्टेज, कूलर और जनरेटर रहा। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील जोन है, जहां हाथियों, बाघों एवं तेंदुओं के अलावा अन्य जानवर और पक्षियों की प्रजातियां रहती हैं।
मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत मंदिर समिति के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। राजाजी टाइगर रिजर्व के तहत हरिद्वार वन रेंज के वार्डन अजय लिंगवाल ने बताया कि इस तरह के किसी भी कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद रविवार को टेंट और अन्य व्यवस्थाएं हटा दी गईं। शादी की रस्में मंदिर के अंदर करने की अनुमति दी गई थी। अधिकारियों ने कहा कि शादी बिना किसी भव्य व्यवस्था के, एक सीमित तरीके से संपन्न हुई।
मां सुरेशवरी देवी मंदिर समिति के महासचिव आशीष मारवाड़ी ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मंत्री खजान दास के बेटे की शादी की रस्में सादे तरीके से करने का इरादा था। गर्मी को देखते हुए टेंट और अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं। वन विभाग के अधिकारियों को भी इस बारे में सूचित किया गया था। आशीष मारवाड़ी ने आगे कहा कि उनकी तरफ से कोई गलती नहीं हुई है। वे जल्द ही इस मामले पर अपना जवाब देंगे।
धामी सरकार में समाज कल्याण विभाग के मंत्री खजान दास ने कहा कि वे कई वर्षों से इस मंदिर में आते रहे हैं। उन्होंने अपनी बीमारी से ठीक होने का श्रेय भी देवी के आशीर्वाद को दिया। इसलिए वे चाहते थे कि उनके बेटे की शादी यहीं हो। उन्होंने दावा किया कि उन्हें यह सूचित नहीं किया गया था कि इसके लिए औपचारिक अनुमति की आवश्यकता है।
मंत्री ने कहा कि मंदिर समिति से एक अनुरोध किया गया था। वन अधिकारियों के साथ भी चर्चा हुई थी। उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए सहमति दी थी। हमारा इरादा केवल साधारण रस्में निभाना और शादी को औपचारिक रूप देना था। विभाग के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस कार्यक्रम के लिए कोई लिखित अनुमति नहीं मांगी गई थी।