नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भगवान बुद्ध से जुड़ी वस्तुओं की एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ये वस्तुएं भारत की अनमोल विरासत का हिस्सा हैं। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि पवित्र पिपरहवा अवशेष वियतनाम, थाईलैंड और रूस जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं, जहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं। इन देशों में लोगों ने बड़ी श्रद्धा से इन अवशेषों के दर्शन किए।
दक्षिण दिल्ली के किला राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में 'लाइट एंड लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकंड वंस' नाम की प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह साझा विरासत दिखाती है कि भारत सिर्फ राजनीति, कूटनीति और अर्थव्यवस्था से ही नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और आध्यात्मिकता के गहरे रिश्तों से भी जुड़ा है।
उन्होंने याद दिलाया कि सरकार और गोदरेज समूह के हस्तक्षेप से ये पवित्र अवशेष 125 वर्षों से अधिक समय बाद भारत लाए गए हैं। मोदी ने कहा कि दोनों ने मिलकर पिछले साल मई में हांगकांग में इनकी नीलामी रोकी थी। प्रधानमंत्री ने बौद्ध विद्वानों, राजनयिकों और अन्य अतिथियों की उपस्थिति में कहा, 'भारत के लिए, बुद्ध के पवित्र अवशेष केवल अवशेष नहीं हैं, बल्कि हमारी वंदनीय विरासत व सभ्यता का एक अटूट हिस्सा हैं।'
मोदी ने कहा, 'भारत न केवल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का संरक्षक है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवंत वाहक भी है।' प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका जन्मस्थान गुजरात का वडनगर बौद्ध अध्ययन का एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है और वाराणसी के पास स्थित सारनाथ, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, उनकी कर्मभूमि है। मोदी संसद में वाराणसी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। मोदी ने नेपाल के लुम्बिनी, जापान के तो-जी मंदिर और किंकाकु-जी, चीन के शीआन में स्थित 'जायंट वाइल्ड गूज पैगोडा' और मंगोलिया के गांडन मठ की अपनी यात्राओं को याद किया।