देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या का मामला तूल पकड़ चुका है। ऑल इंडिया चकमा स्टूडेंट यूनियन समेत कई संगठनों ने इसे नस्लीय हमला (हेट क्राइम) करार दिया है। मामले में न्याय की गुहार लगाई है। मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर देहरादून पुलिस और प्रशासन को नोटिस जारी कर हत्याकांड मामले में तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। इस इसके बीच देहरादून पुलिस की ओर से मामले में नस्लीय टिप्पणी और नस्लीय हमले के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस की जांच और दावों ने छात्र संगठन और मामले को जोर-शोर से उठा रहे लोगों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। ऐसे में एंजेल चकमा प्रकरण के हत्यारों को लेकर कई प्रकार के सवाल उठने लगे हैं।
देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने नस्लीय टिप्पणी या विवाद में हत्या की बात से साफ इनकार किया है। एसएसपी का कहना है कि यह विवाद नस्लीय नहीं, बल्कि दो गुटों के बीच अचानक हुई कहासुनी का परिणाम था। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि एंजेल चकमा पर हमला करने वाले आखिर कौन हैं? देहरादून पुलिस की ओर से अब तक हुई जांच में सामने आया है कि एंजेल चकमा और उसके भाई माइकल चकमा पर हत्या करने वाले आरोपी भी पूर्वोत्तर के हैं।
एसएसपी का कहना है कि हमलावर गुट में शामिल लोगों में मणिपुर और नेपाल जैसे पर्वतीय इलाके के हैं। बोक्सा जनजाति के युवकों पर एजेंल पर जानलेवा हमले का आरोप लगा है। पुलिस ने अब तक इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो नाबालिग शामिल हैं। वहीं, एक आरोपी घटना के समय से फरार बताया जा रहा है। उस पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया है।
एसएसपी अजय सिंह का कहना कि एंजेल चकमा की मौत एक बेहद दुखद घटना है। मृतक छात्र एंजल चकमा अपने भाई के साथ बाजार से सामान खरीदने गया था। उसी दौरान पास में छह युवकों का एक समूह शराब पी रहा था। इसी बीच दोनों पक्षों में किसी बात को लेकर टीका-टिप्पणी हुई, जो देखते ही देखते तीखी झड़प में बदल गई।
एसएसपी ने कहा कि विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने छात्र के साथ जमकर मारपीट की, जिससे उसे गंभीर चोटें आई। अस्पताल में उपचार के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया। सोशल मीडिया पोस्ट और छात्र संगठनों के उठाए जा रहे नस्लीय हमले के मुद्दे पर एसएसपी ने कहा कि इस प्रकार की बात जांच में नहीं आई है।
एंजेल चकमा की हत्या का मामला देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। एसएसपी ने कहा कि फरार चल रहे छठे आरोपी के खिलाफ कोर्ट से वारंट प्राप्त कर लिया गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं। आरोपी नेपाल भाग गया है। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ और पुलिस टीम बार्डर पार कर नेपाल भी गई। हालांकि, आरोपी को गिरफ्तार करने में कामयाबी नहीं मिल सकी है।
सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की सूचना के आधार पर पुलिस ने छह आरोपियों की पहचान की। पुलिस ने इनमें से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। छात्र की मौत के बाद पुलिस ने मुकदमे में हत्या की धाराएं जोड़ दी हैं। छात्र संगठनों ने पुलिस पर मामले में पहले हत्या की धाराएं न जोड़ने का गंभीर आरोप लगाया था। हालांकि, एसएसपी ने सामने आकर घटना के सभी पहलुओं के बारे में जानकारी दी है।
पुलिस के दावे के बाद से सवाल उठ रहा है कि आखिर नस्लीय टिप्पणी और हमले का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह कितना सही है। मामले के आरोपियों की पहचान सामने आने के बाद इस प्रकार से सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाए जाने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
एंजेल चकमा हत्याकांड में राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले में कहा कि हमें एक ऐसा मृत समाज नहीं बनना चाहिए जो देशवासियों को निशाना बनाए जाने पर आंखें मूंद ले। राहुल गांधी ने दावा किया कि ऐसी घटनाएं उस नफरत का नतीजा हैं, जो युवाओं के बीच परोसी जा रही है। इस मामले में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने घृणित मानसिकता का दुष्परिणाम बताया।
अखिलेश ने कहा कि विघटनकारी सोच रोज किसी की जान ले रही है और सरकारी अभयदान प्राप्त ये लोग विष-बेल की तरह फल-फूल रहे हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 'एक्स' पर इसे मानवता और संवेदनशीलता पर गहरा आघात बताया। उन्होंने कहा कि मैं पीड़ित परिवार के साथ खड़ा हूं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को त्रिपुरा के मृतक छात्र एंजेल चकमा की पिता तरुण प्रसाद चकमा से फोन पर बात की। उन्होंने एंजेल की हत्या पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि वह इस घटना से व्यक्तिगत तौर पर दुखी हूं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री से भी उनकी बात हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस प्रकार का माहौल कभी नहीं रहा है। यहां देश-विदेश से बच्चे पढ़ने आते हैं। सरकार पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।