ऋषिकेश: उत्तर भारत की आपराधिक दुनिया में चर्चित नाम रहे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर और खाईखेड़ी गांव के गैंगस्टर विनय त्यागी उर्फ टिंकू त्यागी की मौत अब एक साधारण आपराधिक घटना नहीं रह गई है। शनिवार सुबह एम्स ऋषिकेश में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। विनय त्यागी बीते बुधवार को हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में कोर्ट में पेशी के लिए ले जाते समय पुलिस अभिरक्षा में हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ था।
बताया गया कि हमलावरों ने बेहद नजदीक से उस पर गोलियां चलाई थीं, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। पहले उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में हालत बिगड़ने पर एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया, जहां कई दिनों तक इलाज के बाद उसकी मौत हो गई।
विनय त्यागी की मौत के बाद मामला उस समय और सनसनीखेज हो गया, जब उसकी बहन सीमा त्यागी ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके भाई की हत्या के पीछे करीब 750 करोड़ रुपये के कथित काले धन का मामला जुड़ा हुआ है।
सीमा त्यागी के अनुसार, यह रकम एक बड़े ठेकेदार की बताई जा रही है, जिसे देहरादून के एक डॉक्टर के घर छिपाकर रखा गया था। विनय त्यागी को इस रकम की जानकारी हो गई थी और वह इसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को देने की तैयारी कर रहा था।
परिवार का आरोप है कि जैसे ही ठेकेदार को इस बात की जानकारी हुई, उसने साजिश रचनी शुरू कर दी। आरोप है कि डॉक्टर को डराया-धमकाया गया और उसके जरिए विनय त्यागी पर चोरी का झूठा मामला दर्ज कराकर उसे जेल भिजवा दिया गया।
सीमा त्यागी ने यह भी कहा कि विनय की पत्नी के चुनाव लड़ने के दौरान भी ठेकेदार से विवाद हुआ था, तभी से दोनों के बीच रंजिश चल रही थी। इसी कारण विनय काले धन का भंडाफोड़ करना चाहता था।
परिजनों का आरोप है कि विनय त्यागी के खिलाफ लक्सर और पुरकाजी में फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। साथ ही देहरादून जेल से रुड़की जेल शिफ्ट करने के फर्जी कागजात भी तैयार किए गए, जबकि परिवार की ओर से ऐसा कोई आवेदन नहीं दिया गया था।
परिवार का कहना है कि पेशी के दौरान जानबूझकर सुरक्षा में लापरवाही बरती गई, ताकि रास्ते में ही विनय त्यागी को खत्म किया जा सके और 750 करोड़ रुपये के काले धन का मामला सामने न आ सके।