मसूरी: उत्तराखंड में पहाड़ों की रानी मसूरी एक बार फिर संस्कृति, संगीत और पर्यटन के रंग में सराबोर हो गई। बुधवार को सर्वे मैदान से निकाली गई भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा के साथ मसूरी में विंटर लाइन कार्निवाल का विधिवत शुभारंभ हो गया। शोभायात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से की गई पुष्प वर्षा ने पूरे शहर को उत्सवमय माहौल में बदल दिया। नववर्ष के दौरान छुट्टियां मनाने पहाड़ों पर पहुंच रहे लोगों के लिए यह कार्निवल एक शानदार उत्सव की तरह है। नए साल के रंग में पूरा शहर रंगा नजर आ रहा है। ऐसे में कार्निवल का रंग इस उत्सव पर चढ़ता दिख रहा है।
कार्निवल को लेकर शोभायात्रा सर्वे मैदान से शुरू होकर लंढौर बाजार, घंटाघर और कुलड़ी माल रोड होते हुए गांधी चौक पर संपन्न हुई। यात्रा में गढ़वाल सभा मसूरी, झूमिलो ग्रुप समेत कई सांस्कृतिक संस्थाओं के कलाकारों और विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ढोल-दमाऊ की गूंजती थाप पर कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते हुए आगे बढ़ते रहे, जिसे देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर स्थानीय लोग और पर्यटक बड़ी संख्या में जुटे रहे।
शोभायात्रा के गांधी चौक पहुंचते ही आईटीबीपी और सीआरपीएफ बैंड की शानदार प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। इसके साथ ही मांगल गीतों का आयोजन हुआ और स्वजन शिक्षा समिति के तत्वावधान में लोक नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
गांधी चौक पर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने विंटर लाइन कार्निवाल का विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद उत्तराखंड का पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। पर्यटन और स्थानीय व्यवसाय को दोबारा गति देने के उद्देश्य से मसूरी और नैनीताल में विंटर लाइन कार्निवाल की शुरुआत की गई, जिसका सकारात्मक प्रभाव आज स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस कार्निवाल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं। पहाड़ के उत्पादों, पारंपरिक खानपान और स्थानीय व्यंजनों को देश-विदेश में पहचान मिली है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि कार्निवाल का पहला दिन ‘उत्तराखंड के गांधी’ इंद्रमणि बडोनी को समर्पित किया गया है, जबकि दूसरा दिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड राज्य का गठन नहीं हुआ होता तो न आज यह कार्निवाल होता और न ही राज्य की सांस्कृतिक पहचान को ऐसा मंच मिल पाता।
गणेश जोशी ने कहा कि विंटर लाइन कार्निवाल उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति के प्रचार-प्रसार का बड़ा माध्यम बन चुका है। इस बार कार्निवाल में पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, लोकनृत्य और स्थानीय खानपान को विशेष रूप से प्रमुखता दी गई है। इससे पर्यटक उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से सीधे जुड़ सकेंगे।
एसडीएम राहुल आनंद ने बताया कि कार्निवाल के तहत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है और यह आयोजन 29 दिसंबर तक चलेगा। उन्होंने कहा कि स्टार नाइट समेत सभी प्रमुख कार्यक्रम टाउनहॉल में आयोजित किए जाएंगे। पर्यटकों की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
कार्निवाल के दौरान करिश्मा शाह, रुहान भारद्वाज, मीना राणा, गजेन्द्र राणा, सौरभ मैठाणी सहित उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। इसके साथ ही इंद्रमणि बडोनी के जीवन और योगदान पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। होमस्टे योजना के जरिए पहाड़ों में बंद पड़े घरों को फिर से आबाद किया गया है, जिससे गांवों में भी पर्यटन को नई दिशा मिली है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री व्यस्तता के कारण उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, लेकिन कार्निवाल के दौरान एक दिन मसूरी आकर शहर को बड़ी सौगात देंगे।