देहरादून: बच्चों से प्रताड़ित बुजुर्ग हों या भूमाफियाओं के सताए हुए लोग, आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़ने वाली बेटियां हों या फिर दिव्यांगजन, इन सबके लिए आज देहरादून के डीएम सबसे बड़े मददगार बने हुए हैं। देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल असहाय बुजुर्गों के लिए वह लायक बेटा साबित हो रहे हैं, जो अपने ही बच्चों के सताए हुए हैं। इतना ही नहीं डीएम बंसल ने देहरादून में एक नई मुहिम शुरू करते हुए रायफल क्लब फंड का भी उपयोग किया और जरूरतमंदों को इस फंड से सहायता दिलवाई। जिसके चलते आज शहर के मुखिया आम जनता की पहली पसंद बन गए हैं।
सितंबर 2024 को देहरादून जिलाधिकारी का पद संभालने के बाद आईएएस सविन बंसल ने स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने के लिए सबसे पहले कोरोनेशन अस्पताल पर ऐक्शन लिया। उन्होंने यहां लाइन में लगकर पर्ची बनवाई। अस्पताल में व्यवस्थाओं का मुआयना किया। जब अस्पताल प्रशासन को डीएम के छापेमारी का पता चला, तब तक डीएम पूरे अस्पताल को खंगाल चुके थे। इसके बाद एक दिन वे एकाएक शराब के ठेके पर पहुंचे और ग्राहक बन कर शराब खरीदी। जहां सेल्समैन ने निर्धारित रेट से 20 रुपये ज्यादा वसूले तो डीएम ने ओवररेटिंग के मामले में अनुज्ञापी पर 50 हजार का जुर्माना ठोंक दिया।
इसके बाद डीएम बंसल कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के कारण चर्चाओं में आए तो वहीं इससे पहले लोकसभा स्पीकर को रिसीव करने नहीं जाने और फोन न उठाने के मामले में भी सुर्खियों में रहे। हालांकि, जनता के बीच लोकप्रिय छवि होने के कारण इन मामलों ने ज्यादा तूल नहीं पकड़ा। इसी बीच जिलाधिकारी सविन बसंल ने एक और नई मुहिम शुरू की। डीएम ने राइफल क्लब फंड का उपयोग निर्धन, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू किया। इस फंड का उपयोग, शस्त्र लाइसेंस जैसे लक्जरी लेन-देन के लिए किया जाता है, लेकिन डीएम की पहल पर ऐसा पहली बार हुआ कि इस फंड का उपयोग गरीब और कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए किया गया। इसके तहत चिकित्सा, मकान मरम्मत और स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
किसी को घर की मरम्मत के लिए तो किसी को मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए, किसी को उपचार के लिए तो किसी को स्वरोजगार शुरू करने और दुर्घटना में आंख खोने पर कृत्रिम आंख लगाने के लिए इस फंड से मदद मिली। डीएम बंसल ने इस फंड का उपयोग सीएसआर के रूप में किया। वहीं, जिलाधिकारी की सख्ती के चलते बकाए की वसूली भी तेजी से की गई।
हाल ही में एक मां की गुहार पर डीएम का दिल इस कदर पिघल गया कि उन्होंने तत्काल बच्चे के उपचार के लिए कदम उठाए। डीएम के निर्देश पर अब बच्चे का एम्स में उपचार चल रहा है। वहीं, पिता की मृत्यु उपरान्त एक बेटी की पढ़ाई पर आए संकट पर डीएम बंसल ने संकटमोचन बन गए। डीएम के संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने चित्रा कालरा को प्रतिष्ठित संस्थान में स्नातक बी-कॉम आनर्स में दाखिला दिलाया और उसे आश्वस्त किया कि चित्रा की पढाई, आवाजाही, किताबों का समस्त व्यय जिला प्रशासन और संस्थान वहन करेगा। अपने पिता की मृत्यु के बाद लोन चुकाने में असमर्थ चित्रा और हेतल पढ़ाई और मकान बचाने की गुहार लगाने डीएम के पास आई थीं, जिस पर डीएम ने जल्द ही ऋण माफी का समाधान करवाने का आश्वासन दिया है।
देहरादून के डीएम पद पर तैनात सविन बंसल 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में यूपीएससी परीक्षा क्लियर की। सविन की रैंक 34वीं थी। सविन बंसल को उत्तराखंड कैडर अलॉट किया गया। सविन बंसल उत्तराखंड के अल्मोड़ा और नैनीताल के डीएम भी रह चुके हैं। इन जिलों में भी उनके पीपुल कनेक्ट कार्यों की जमकर सराहना हुई।
सविन बंसल ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र से बीटेक किया है। उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से रिस्क डिजास्टर में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। आईएएस सविन बंसल वर्ष 2021 में यूनाइटेड किंगडम कॉमनवेल्ड स्कॉलरशिप के लिए भी चुने गए। वे भारत से इकलौते ऐसे आईएएस अफसर थे, जिन्हें यूके की इस स्कॉलरशिप के लिए चुना गया। दरअसल, यूनाइटेड किंगडम की ओर से कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप दी जाती है। यह स्कॉलरशिप ब्रिटेन की अलग-अलग यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दी जाती है।