नई दिल्ली: बिहार के बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान समेत 12 राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम चल रहा है। SIR को लेकर जहां एक ओर चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता की बात कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। साथ ही फॉर्म-6 को लेकर कई आरोप लगा रही हैं। समझते हैं क्या है फॉर्म-6 ...
निर्वाचन आयोग ने 27 अक्टूबर को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में एसआईआर शुरू करने की घोषणा की थी। जिसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, गोवा, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को शामिल किया गया है।
फॉर्म-6 निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया गया एक ऐसा फॉर्म है, जिसका प्रयोग वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए किया जाता है। यदि आप वोटर नहीं हैं या फिर आपकी उम्र इसी साल 18 वर्ष की पूरी हुई है, तो आप इस फॉर्म को भरकर वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा सकते हैं। साथ ही आप एक जगह से दूसरी जगह अपना वोट ट्रांसफर भी इसी फॉर्म के जरिए कर सकते हैं।
फॉर्म-6 मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए एक आवेदन है जिसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरा जा सकता है। इसके अलावा जिस विधानसभा में आप रजिस्टर्ड हैं, वह जगह छोड़कर आप कहीं और शिफ्ट हो रहे हैं तो आपके इस फॉर्म-6 के जरिए अपना नाम वहां की वोटर लिस्ट में जुड़वाना होगा। आवेदक को फॉर्म में अपना नाम,उम्र, लिंग, जन्म स्थान समेत अन्य सामान्य जानकारी भरनी होती है।
जबकि फॉर्म 7 मतदाता सूची से नाम हटवाने या किसी गलत नाम के जुड़ जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे कि यदि किसी की मृत्यु हो गई हो या फिर किसी ने अपना कहीं और बना लिया हो तो उसका नाम फॉर्म 7 द्वारा हटवाया जा सकता है। वहीं फॉर्म 8 मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में सुधार के लिए है।
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरना आवश्यक है। फॉर्म 6 को आप निर्वाचन आयोग की वेबसाइड से ऑनलाइन या फिर स्थानीय निर्वाचन आयोग के कार्यालय जाकर भरकर पंजीकरण करा सकते हैं।
निर्वाचन कानून के अनुसार, मतदाता सूची का पुनरीक्षण हर चुनाव से पहले या आवश्यकता पड़ने पर किया जाना चाहिए। लेकिन पिछले दो दशकों में समाजिक-जनसांख्यिकीय बदलावों, बार-बार के पलायन, मृत मतदाताओं के नाम न हटने और विदेशी नागरिकों के गलत शामिल होने जैसी समस्याओं के कारण मतदाता सूचियों की शुद्धता पर सवाल उठे हैं। इसलिए यह विशेष पुनरीक्षण अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।