देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून में इंपीरियल वैली नाम से प्लॉटिंग कर रहे शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी साक्षी सहित पूरा परिवार 17 अक्टूबर से लापता है। उनकी गुमशुदगी को लेकर साक्षी के भाई सुलभ गोयल ने हापुड़ कोतवाली में तहरीर दी है। इस तहरीर में उन्होंने कहा है कि उनकी बहन साक्षी 17 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे पति शाश्वत, सास अंजली, ससुर प्रवीन और बेटे रिद्वान गर्ग के साथ हापुड़ में उनके विवेक विहार राधापुरी स्थित घर से निकली थी।
17 अक्टूबर को साक्षी अपने परिवार के साथ यह कहकर घर से निकली थी कि देहरादून वापस जाना है। बाद में उनके स्टाफ विनीत से संपर्क करने पर पता चला कि शाश्वत ने भाई दूज पर आने का मैसेज व्हाट्सएप पर किया था। वह परिवार के साथ हर साल दीपावली पर परिवार संग बदरीनाथ और केदारनाथ दर्शन को जाते हैं, लेकिन अब उनका कहीं पता नहीं चल रहा है।
सुलभ ने पुलिस को बताया कि उनकी बहन और जीजा सहित परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं। पुलिस को दी शिकायत में आशंका व्यक्त की गई है कि कहीं उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई। गर्ग परिवार हुंडई क्रेटा कार और हुंडई टिसोन कार से सफर कर रहा था। कई लोग इसे अनहोनी करार दे रहे हैं तो कुछ लोग यह भी आशंका जता रहे हैं कि कहीं यह सब पुष्पांजलि बिल्डर जैसा किसी तरह कर स्कैम तो नहीं है।
बता दें कि सहस्रधारा रोड पर आर्किड पार्क आवासीय परियोजना शुरू करने वाले पुष्पांजलि इंफ्राटेक के निदेशक दीपक मित्तल अपनी पत्नी राखी मित्तल के साथ साल 2020 से फरार हैं। मित्तल दंपती पर 90 फ्लैट खरीदारों से 45 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़पने का आरोप है। मित्तल ने पीएनबी की इंदिरा नगर शाखा से जो 21 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लिया था, वह भी एनपीए हो चुका है। पुलिस, एसटीएफ और ईडी दोनों की लगातार तलाश में जुटी है।
मित्तल दंपती के फरार होने के बाद उनके पार्टनर और परियोजना की जमीन के मालिक राजपाल वालिया को इसका खामियाजा उठाना पड़ा। उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा और अब वह दीपक मित्तल और उनके सहयोगियों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। साथ ही एनसीएलटी में अपनी जमीन और उससे जुड़े अधिकार के लिए भी लड़ाई लड़ रहे हैं।
ऐसे में, अब बिल्डर शाश्वत गर्ग और उनके परिवार के लापता होने से शहर के बिल्डर, निवेशक और प्रॉपर्टी डीलर सकते में हैं। वहीं लोग यह भी आशंका जता रहे हैं कि कहीं इसके पीछे भी कोई स्कैम तो नहीं है। बिल्डर की परियोजनाओं में पैसा लगाने वाले लोग यही कामना कर रहे हैं कि सब कुछ ठीक हो और वह वापस लौट आएं।