देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रशासनिक फैसले अधिकारियों के विवेक से नहीं, बल्कि भाजपा के विवेक से लिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पूंजीपतियों की पार्टी है, जिसने कभी गरीबों, बेरोजगारों और आम जनता के हित में गंभीरता से नहीं सोचा।
हरीश रावत ने कहा कि भाजपा के लोग ”रावण के भी रावण” हैं और यह सब रावण के वंशज है।रावण जैसे अलंकार और अहंकार के साथ राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की यही विडंबना है कि किसी को रोजगार मिल जाता है। किसी का रोजगार छिन जाता है। इसी भाव के साथ उन्होंने लोकतंत्र के देवता से मन्नत मांगी कि जिस तरह आज देश और राज्य का युवा बेरोजगार है, आने वाले समय में भाजपा को भी जनता “बेरोजगार” बना दे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों, पर्यटन स्थलों और संसाधनों को “दोस्तों और चहेतों” को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को सिर्फ नाम का राज्य छोड़ दिया गया है, जबकि इसकी बहुमूल्य जमीनें और संसाधन गैर-उत्तराखंडियों के हाथों में सौंपे जा रहे हैं। यह सब एक सोचा-समझा षड्यंत्र है, जिससे राज्य की आत्मा को कमजोर किया जा रहा है।
हरीश रावत ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर भी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा मनरेगा का नाम बदलने और उसकी आत्मा खत्म करने का काम कर रही है। यह योजना महात्मा गांधी के नाम पर इसलिए रखी गई थी क्योंकि गांधीजी भारत की संपूर्णता, गरीबों के कल्याण और रामराज्य के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि मनरेगा रोजगार की एक “कानूनी क्रांति” थी, जिसे धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। इस योजना की आत्मा ग्राम विकास थी, जिसमें सीधा पैसा गांव तक जाता था और गांव के लोग खुद तय करते थे कि उसे कैसे खर्च करना है। भाजपा ने इस पूरी व्यवस्था को कमजोर कर दिया है।
कांग्रेस नेता ने ऐलान किया कि मनरेगा का नाम बदलने और महात्मा गांधी के नाम को हटाने के खिलाफ कांग्रेस पूरे देश में जन-जागरण अभियान चलाएगी। उन्होंने कहा कि जैसे ही कांग्रेस सत्ता में आएगी, महात्मा गांधी के नाम पर एक नहीं बल्कि एक दर्जन जनकल्याणकारी योजनाएं लाई जाएंगी, जिनका सीधा लाभ गरीबों और आम जनता को मिलेगा। उन्होंने साफ कहा कि जो भी महात्मा गांधी के नाम को मिटाने की कोशिश करेगा, कांग्रेस उसके खिलाफ सड़कों से संसद तक संघर्ष करेगी।