देहरादून: उत्तराखंड के सहस्रधारा में बादल फटने की घटना के बाद से स्थिति खराब है। सहस्रधारा के पास स्थित मजाड़ा गांव पर आपदा का नया खतरा मंडरा रहा है। मंगलवार को अतिवृष्टि से आए भूस्खलन और मलबे में गांव पहले ही तबाही झेल चुका है, अब गांव के ऊपर पहाड़ी में करीब 5 फीट चौड़ी और 50 मीटर लंबी दरारें उभर आई हैं। इससे गांव में रहने वाले 60 से अधिक परिवारों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पुनर्वास की मांग की है। आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार चलाया जा रहा है। इसके बाद भी करीब तीन लोगों के मलबे में दबे होने की बात सामने आई।
मंगलवार को कारलीगाड़ नदी से आए मलबे ने गांव को तबाह कर दिया था। उसी दौरान तीन लोग मलबे में दब गए, जिनमें अंकित नामक युवक भी शामिल है। गुरुवार को भी प्रशासनिक टीम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जेसीबी और स्थानीय लोगों की मदद से खोजबीन करती रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे, लेकिन देर शाम तक लापता लोगों का पता न चलने से निराशा छा गई। एक व्यक्ति के मलबे से निकलने की बात सामने आई है।
गांव के लोगों का कहना है कि हम लोगों ने जीवन भर की कमाई लगाकर मकान बनाई है। अगर पहाड़ी दरक गई तो पूरा गांव भूस्खलन की चपेट में आ जाएगा और सबकुछ खत्म हो जाएगा। लोगों का कहना है कि जब तक उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाया नहीं जाता, हर पल उनके जीवन पर संकट बना रहेगा। एसडीएम सदर हरिगिरी ने बताया कि पहाड़ी पर आई दरारों का निरीक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि अब यहां भूगर्भीय सर्वे कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास सहित अन्य कदम उठाए जाएंगे।
कारलीगाड़ और मजाड़ा क्षेत्र इस वक्त आपदा की दर्दनाक तस्वीर पेश कर रहे हैं। जिन घरों में कभी चहल-पहल रहती थी, वे अब ताले लगे खंडहर में बदल गए हैं। घाटी में मातम पसरा है और सन्नाटे के बीच सिर्फ नदी और गदेरों का शोर सुनाई देता है। सहस्रधारा से आधा किलोमीटर आगे सड़क का हिस्सा नदी में समा गया है। इस कारण पूरा इलाका कट चुका है। जेसीबी की मदद से वैकल्पिक रास्ता बनाने की कोशिश हो रही है, लेकिन कई जगह पैदल चलना भी जान जोखिम में डालने जैसा है।
सेरा गांव से मजाड़ा तक जाने वाली सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त है। लोग मजबूरन पगडंडियों से होकर गुजर रहे हैं, जहां ऊपर से मलबा गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। वहीं, कारलीगाड़ में कई घर, रिजॉर्ट और खेत अब भी मलबे के नीचे दबे हैं। पानी की सप्लाई लाइन टूट चुकी है और बिजली के पोल गिर गए हैं।
आफत के इस समय में सेरा गांव के लोग आपदा प्रभावित परिवारों के लिए सहारा बने हैं। वे गांव में खाना बनाकर पैदल ही दो किलोमीटर का खतरनाक सफर तय कर मजाड़ा और कारलीगाड़ तक भोजन पहुंचा रहे हैं। गुरुवार को भी युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर प्रभावितों तक खाना पहुंचाया।