देहरादून: उत्तराखंड के पर्यटक स्थल सहस्त्रधारा में पिछले दिनों बादल फटने से जो तबाही मची, उसने कई परिवारों को ना भरने वाला जख्म दे दिया है। मजाडा गांव में रहने वाली 16 साल की पूजा सालों से जिस एक कमरे के घर में रह रही थी, वह मलबे में बह गया। पूजा के पिता का निधन 12 साल पहले हो चुका है। इससे एक साल पहले मां की मौत हो चुकी थी। इस एक कमरे में वह अपने तीन भाइयों के साथ रहकर किसी तरह गुजारा कर रही थी।
पूजा की दुख भरी कहानी सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही है। रोते हुए पूजा कहती हैं- 'मुझे अपने माता और पिता का चेहरा तक नहीं याद है। पिता एक कमरे का मकान छोड़ गए थे। भाइयों ने मुझे पाला पोसा। मैं पढ़ाई भी कर रही थी, लेकिन अब शायद स्कूल जा पाऊं। आगे की जिंदगी कैसे गुजरेगी, कुछ पता नहीं।'
पूजा ने बताया कि उसके भाई मजदूरी करके किसी तरह गुजारा कर रहे थे। घर बहने के बाद वह अपने भाइयों के साथ किसी तरह पहाड़ों के रास्ते राहत कैंप तक पहुंची।
मलबे में घर बहने के साथ पिता की फोटो भी बह गई। पिता की यह फोटो देखकर वह उनको याद कर लेती थी लेकिन आपदा ने सबकुछ छीन लिया। गौरतलब है कि सहस्त्रधारा समेत कई पर्यटक स्थलों पर बादल फटने से काफी नुकसान हुआ था। बाढ़ के पानी में टपकेश्वर महाराज मंदिर में शिवलिंग पूरी तरह डूब गया था।