देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से आपदा ग्रस्त क्षेत्रों के लिए घोषित किए गए 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज को अपर्याप्त और निराशाजनक बताया। हरीश रावत ने कहा कि यह अपर्याप्त हैं, जरूरत से बहुत कम है। यह धनराशि तो क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए भी काफी नहीं है। इससे लोग वास्तव में निराश हैं। भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रधानमंत्री के घोषित पैकेज को नाकाफी बताने के लिए हरीश रावत पर पलटवार करते हुए कहा कि यह केवल एक अंतरिम राहत राशि है और अभी आगे अधिक मदद दी जाएगी।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा कि 1200 करोड़ रुपये शुरूआती मदद है और केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के बाद अंतिम मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक संरक्षक की भांति उत्तराखंड पहुंचकर पीड़ितों का हाल-चाल जाना। महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिन्होंने आपदाग्रस्त क्षेत्रों में जाने तक की जहमत नहीं उठाई। वे आज राहत-बचाव पर ज्ञान दे रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं ने धरातल पर जाकर पीड़ितों के आंसू पोंछने या तकलीफ जानने की कोशिश नहीं की और न ही किसी ने अपने कार्यकर्ताओं से ऐसा करने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को यहां प्रदेश के आपदाग्रस्त स्थानों में राहत एवं बचाव कार्य तथा वहां हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए एक समीक्षा बैठक की थी। साथ ही, उन्होंने 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि इस समय राज्यों को अग्रिम भुगतान सहित आपदा प्रबंधन अधिनियम और नियमों के अंतर्गत घोषित सहायता अंतरिम अवधि के लिए है और केंद्र सरकार राज्यों के ज्ञापन और केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट के आधार पर मूल्यांकन की आगे समीक्षा करेगी।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आपदा प्रभावित लोगों और बचाव एवं राहत कार्य में जुटे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के कर्मियों से भी भेंट की थी। इस मानसून में उत्तरकाशी जिले में धराली-हर्षिल, चमोली में थराली, रुद्रप्रयाग में जखोली-बसुकेदार, बागेश्वर में कपकोट, पौड़ी में सैंजी जैसे क्षेत्रों में अतिवृष्टि, बादल फटने, बाढ़, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से भारी तबाही हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल से अब तक प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं में 81 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। वहीं, इन आपदाओं में 94 अन्य लापता बताये जा रहे हैं। इन आपदाओं में 80 लोग घायल भी हुए हैं।