देहरादून: उत्तराखंड में दूसरे प्रदेशों से आए लोग अब होम स्टे योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। पर्यटन विभाग अपनी होमस्टे योजना को अब केवल राज्य के स्थायी निवासियों तक सीमित करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम बाहरी लोगों द्वारा योजना का “दुरुपयोग” कर व्यावसायिक संपत्तियां चलाने के मामलों के बाद उठाया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर सोमवार को होमस्टे ऑपरेटर, टूर ऑपरेटर, होटल एसोसिएशन और सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक में चर्चा की गई।
पर्यटन सचिव धीरज सिंह गर्ब्याल ने कहा, “स्थानीय परिवारों को सहयोग देने और राज्य की संस्कृति व भोजन को प्रदर्शित करने के लिए शुरू की गई इस योजना का अन्य राज्यों के लोग गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वे अपने घरों को होमस्टे के रूप में पंजीकृत कर लेते हैं, घरेलू बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल करते हैं और खुद वहां रहने के बजाय स्टाफ रखते हैं। यह इस परियोजना के मूल उद्देश्य को ही नकार देता है।”
उन्होंने कहा कि ऐसे ऑपरेटर अब बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत पंजीकरण करा सकेंगे, जो शहरी क्षेत्रों में लागू होती है और जिसमें 1 से 6 कमरे तक की अनुमति है। सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि जो होमस्टे अभी तक रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराएं नहीं तो उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना और कड़ी कार्रवाई होगी।
पर्यटन सचिव ने कहा कि उत्तराखंड पर्यटन एवं ट्रैवल बिजनेस पंजीकरण विनियम 2014 (संशोधित 2016) में बदलाव के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। प्रमुख बदलावों में होमस्टे को गैर-व्यावसायिक मानते हुए बिजली व पानी कर से छूट देना, पंजीकरण अवधि को 5 वर्ष करना (बाद में शुल्क देकर नवीनीकरण) और दुरुपयोग रोकने के लिए निगरानी को कड़ा करना शामिल है। राज्य में वर्तमान में 5,000 से अधिक पंजीकृत होमस्टे हैं। गर्ब्याल ने कहा, “हमने हितधारकों से सुझाव ले लिए हैं और जल्द ही प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखेंगे।”