देहरादून: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इस दीवाली वायु प्रदूषण ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। दीवाली की रात आतिशबाजी के कारण दोनों शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। जहां दिल्ली में एक्यूआई 500 के स्तर को छू गया, वहीं देहरादून में भी प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए खासकर दून विश्वविद्यालय क्षेत्र में एक्यूआई 460 तक दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों ने देहरादून में बढ़ते प्रदूषण के लिए दीवाली की आतिशबाजी को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। उत्तराखंड बनने के बाद से यह पहली बार है जब किसी क्षेत्र में एक्यूआई का स्तर इतना ऊंचा दर्ज किया गया। दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के प्रमुख डॉ. विजय के अनुसार दीवाली की रात 10 बजे से एक्यूआई का ग्राफ तेजी से बढ़ना शुरू हुआ और मध्यरात्रि 12:30 बजे के आसपास 460 तक पहुंच गया।
हालांकि, यह स्थिति कुछ देर तक ही रही और रात 2 बजे के बाद एक्यूआई 200 से नीचे आ गया। घंटाघर और नेहरू कॉलोनी में लगे थर्ड-पार्टी रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम ने भी इसकी पुष्टि की।
देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण ने दीवाली की रात को और भयावह रूप ले लिया। एक्यूआई 500 के स्तर तक पहुंचने के साथ दिल्ली की हवा पूरी तरह से दमघोंटू हो गई। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रही, बल्कि विश्व स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई।
उत्तराखंड के अन्य शहरों में भी दीवाली की रात प्रदूषण का स्तर बढ़ा। टिहरी में एक्यूआई 66 रहा, जो पिछले साल की तुलना में कम है । नैनीताल में एक्यूआई 111 दर्ज किया गया, जो पिछले साल 119 था। वहीं, ऋषिकेश और हल्द्वानी में इस बार प्रदूषण में वृद्धि देखी गई, जहां एक्यूआई क्रमशः 135 और 198 रहा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए राहत की बात यह रही कि देहरादून में इस साल का औसत प्रदूषण पिछले साल की तुलना में कम रहा। नेहरू कॉलोनी में एक्यूआई 230, घंटाघर में 254 और दून विश्वविद्यालय में औसत एक्यूआई 128 दर्ज किया गया।