भूपेंद्र शर्मा: हरियाणा के IPS वाई. पूरन कुमार की मौत का मामला तूल पकड़ चुका है। इससे देश में दलितों को लेकर होने वाली राजनीति में नया मोड़ भी आया है। महापंचायतें सरकार को अल्टिमेटम दे रही हैं। विरोधी पार्टियां घेराबंदी कर रही हैं। छात्र संगठन आगे आए हैं। इसलिए हरियाणा की BJP सरकार बैकफुट पर आ गई है। इसलिए पहले तो आरोपों के घेरे में आए रोहतक के SP को हटाया गया। अब राज्य के DGP शत्रुजीत सिंह कपूर को भी छुट्टी पर भेज दिया गया है।
हरियाणा और पंजाब में अभी अलग-अलग दलों की सरकारें हैं। पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP), IPS अधिकारी के परिवार को इंसाफ दिलाने की लड़ाई को जन-आंदोलन में बदलने की कोशिश कर रही है। दोनों राज्यों में महापंचायत, कैंडल मार्च और धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस और AAP नेता IPS के घर पहुंच रहे हैं।
विपक्षी दलों का कहना है कि यह मामला केवल एक अफसर की मौत का नहीं है, बल्कि यह न्याय, समानता और सामाजिक सम्मान की लड़ाई है। दोनों राज्यों में दलितों की संख्या किसी भी दल के समीकरणों पर असर डाल सकती है। हरियाणा में करीब 22% दलित समुदाय के लोग हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में राज्य की दोनों आरक्षित सीटों सिरसा और अंबाला पर BJP की हार हुई थी। हालांकि इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया। मगर आज BJP मुश्किल में है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसके लिए पार्टी खास रणनीति के तहत राज्य की मान सरकार को घेर रही थी।
मगर IPS की खुदकुशी का मामला सामने आने के बाद AAP नेता BJP पर दलितों के साथ अन्याय करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, AAP सरकार के मंत्री, विधायक इस मुद्दे को आंदोलन में बदलने की कोशिश में हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल इस समय केंद्रीय मंत्री हैं, लेकिन राज्य की राजनीति में उनकी दिलचस्पी बनी हुई है। केंद्रीय नेतृत्व भी नायब सरकार की मदद के लिए आगे आया है।
केंद्र ने जहां अपने राज्य मंत्री रामदास आठवले को IPS के घर भेजा, वहीं मनोहर लाल अपने करीबियों के जरिए डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में हैं। दो बड़े अधिकारियों पर एक्शन हो चुका है। लेकिन IPS का परिवार संतुष्ट नहीं है। इससे केंद्र व हरियाणा की BJP सरकारें बैकफुट पर हैं। अभी तक IPS का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार को भी पता है कि मामला जितना आगे बढ़ेगा, उसका उतना ही असर BJP की रणनीति पर पड़ेगा। बिहार चुनाव करीब हैं। वहां भी दलित वोट काफी अहम हैं। वहीं, चंडीगढ़ में दलित संगठनों की लामबंदी शुरू हो गई है। दलित संगठनों ने रविवार को पंचकूला में महापंचायत की। हरियाणा-पंजाब के दलित संगठनों ने संयुक्त रूप से 31 सदस्यों की संघर्ष समिति का गठन किया है। हरियाणा में नायब सिंह सैनी सरकार के सामने पहले ऐसी स्थिति नहीं आई थी। एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या एक सीनियर IPS सिस्टम के सामने इतना मजबूर हो गया या कर दिया गया कि जान देने के अलावा उसे कोई रास्ता नजर नहीं आया।