देहरादून: वर्ष 1963 के दशक की बात है। मसूरी की वादियां शांत थीं, लेकिन उस दिन उनमें एक अलग ही ऊर्जा थी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मसूरी दौरे पर पहुंचे थे। उनका प्रवास सवॉय होटल, जिसे उस समय कैप्टन कृपा राम संचालित कर रहे थे।
सवॉय होटल, मसूरी की पहचान रहा है ब्रिटिश काल में बना यह होटल भारत की स्वतंत्रता के बाद भी एक विशेष स्थान बना रहा। उस दिन जब शास्त्री जी यहां ठहरे, यह होटल न केवल एक पर्यटक स्थल, बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन गयज्ञं कैप्टन कृपा राम, स्वयं एक सम्मानित व्यक्ति और सवॉय होटल के मालिक ने प्रधानमंत्री शास्त्री का आत्मीय स्वागत किया। दोनों के बीच कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि दिल से दिल की बात हुई। सवॉय होटल के कर्मचारी उस दिन गर्व से फूले नहीं समा रहे थे। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी विनम्रता और सादगी का परिचय देते हुए होटल के सभी कर्मचारियों के साथ सामूहिक फोटो खिंचवाया। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि एक मिसाल थी।
एक प्रधानमंत्री का अपने लोगों के प्रति सम्मान। अपने प्रवास के दौरान शास्त्री ने मसूरी छावनी परिषद का भी दौरा किया। यह दौरा प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना गया। उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय नागरिकों की स्थिति, सुविधाओं और देशभक्ति के योगदान पर चर्चा की। इस मुलाकात ने दर्शाया कि चाहे कोई प्रधानमंत्री हो या एक पूर्व सैन्य अधिकारी जब देश की सेवा का जज्बा साझा हो, तो सम्मान और आत्मीयता अपने आप जन्म लेते हैं। कैप्टन कृपा राम ने जिस तरह प्रधानमंत्री का आतिथ्य किया, वह मसूरी के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया। आज भी जब सवॉय होटल की पुरानी दीवारों को देखा जाता है। वहां कहीं न कहीं उस तस्वीर की छाया दिखती है, जिसमें लाल बहादुर शास्त्री होटल स्टाफ के साथ खड़े हैं सरल, मुस्कुराते हुए और देशभक्ति की एक सजीव मिसाल के रूप में।