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कौन हैं राधा बहन भट्ट? पहाड़ की 'गांधी' को मिला पद्मश्री, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का चेहरा बनीं.

 
  • Shubham Sehgal
  • 26 Jan 2025
  • 680
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बागेश्वर: देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। इसमें उत्तराखंड की राधा बहन भट्ट को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। राधा बहन भट्ट बागेश्वर समेत प्रदेश और देश में पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का चेहरा बनी रही हैं। उन्हें पहाड़ की गांधी तक की उपाधि प्राप्त है। गांधीवादी मूल्यों के जरिए पर्यावरण संरक्षण, बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को मजबूत बनाने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। लक्ष्मी आश्रम कौसानी, बागेश्वर की अध्यक्ष राधा बहन भट्ट के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। मई में होने वाले कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा।
 

कौन हैं राधा बहन?

राधा बहन भट्ट सरला बहन की शिष्या रही है। पिछले 60 वर्षों से वह पहाड़ और पर्यावरण बचाने के अपने जुनून को आगे बढ़ती आ रही है। 17 अक्टूबर 1933 को अल्मोड़ा जिले के धुरका गांव में उनका जन्म हुआ था। राधा बहन ने 12वीं तक की पढ़ाई की ।उन्होंने पिता कमलापति भट्ट और माता रेवती भट्ट की आजीवन सेवा की। इसके साथ-साथ गांधीवादी विचारधारा से जुड़ीं।

वर्ष 1951 में कौसानी स्थित लक्ष्मी आश्रम की शिक्षिका बनीं। वर्ष 1957 में भूदान आंदोलन में शामिल हुईं। उत्तराखंड में पदयात्रा निकाली। इसके बाद राधा बहन ने विनोबा भावे के साथ दो लंबी पदयात्राएं भी की। इसमें एक उत्तर प्रदेश और दूसरी असम में की थी।

पद्श्री को बताया बड़ा सम्मान

राधा बहन आजकल सेवा आश्रम, गुजरात में है। उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुने जाने पर खुशी जताते हुए इसे बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1961 से 1965 तक वह ग्राम स्वराज, शराब विरोधी आंदोलन, वन संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और गाय-बकरी चराने वाली किशोरियों के उत्थान जैसे मुद्दों पर काम करती रहीं। पहाड़ के दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में 25 बाल मंदिरों की स्थापना कर करीब 15,000 जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ा।

राधा बहन न अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में करीब 1,60,000 पौधरोपण किया। वर्ष 1975 में 75 दिनों की लंबी पैदल यात्रा निकाली। इसमें वन संरक्षण, चिपको आंदोलन, शराब विरोधी आंदोलन और ग्राम स्वराज की स्थापना के लिए लोगों को जागरुक किए जाने का अभियान शामिल था।
 

नदियों के सर्वेक्षण से जुड़ीं

वर्ष 2006 से 2010 तक राधा बहन ने उत्तराखंड के हिमालय और नदियों के सर्वेक्षण का काम किया। इस दौरान नदियों पर बनने वाली हाइड्रो पॉवर परियोजनाओं का विरोध भी किया। राधा बहन ने 'हिमालय की बेटियां' पुस्तक भी लिखी है। इसे जर्मन और डेनिस में प्रकाशित किया गया है। अभी वह नौला यानी जलस्रोत बचाव अभियान चला रही हैं। उनका उद्देश्य कौसानी के आसपास के नालों को पुनर्जीवित करना है।
 

मिल चुका है कई सम्मान

राधा बहन भट्ट को गांधीवादी विचारधारा के प्रसार और उन्हें साकार करने में योगदान के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा गोदावरी गौरव, इंदिरा प्रियदर्शिनी पर्यावरण पुरस्कार, मुनि सतबल पुरस्कार और कुमाऊं गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुकी हैं। उन्हें शांति के लिए प्रतिष्ठित नोबल पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया जा चुका है।

 

 
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