Republic Day Short Speech in Hindi: 'जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं, वो हृदय नहीं-वह पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं'
नमस्ते शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों...
ये पक्तियां सिर्फ देशभक्ति का भाव किसी के अंदर जगाने या फिर देशभक्ति ना होने पर किसी को ग्लानि भाव में डालने के लिए नहीं है बल्कि यह समय की जरूरत है और हर नागरिक का मूल कर्तव्य भी कि वह देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझे। आज हम संविधान को देश में लागू हुए 75 साल पूरे हो चुके हैं। 75 साल में गंभीर आर्थिक संकट से चांद पर पहुंचने तक हमारे देश ने कई कीर्तिमान गढ़े हैं और बहुत सारी चीजें अब भी होनी बाकी हैं।

हमारे देश के लिए आज का दिन इतिहास में एक गौरवशाली और स्वर्ण अक्षरों में अंकित दिन है। आज यहां पर हम सब 26 जनवरी का किन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। यह दिन हमें हमारे संविधान की याद दिलाता है, जोकि 26 जनवरी साल 1950 में लागू किया गया था।

हमें गणतंत्र दिवस को सिर्फ तिरंगा फहरा देने और परेड देखने के दिन के रूप में ही नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करने के अवसर के रूप में सामने आया है जिन्होंने अपना बलिदान देकर हमें स्वतंत्रता दिलाई ताकि हम अपना गणराज्य और अपना लोकतंत्र स्थापित कर सकें। आज के दिन हमारे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर और उनके जैसे हजारों सपूतों का योगदान अविस्मरणीय है।

विविधता में एकता की मिसाल वाले भारत देश का संविधान इस बात को सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक को एक समान अधिकार मिले, चाहे उसका धर्म, जाति, भाषा, या क्षेत्र कुछ भी रहा हो। लोकतंत्र के इस उत्सव की भावना हर व्यक्ति की आवाज सुनना है और उसके अधिकारों की रक्षा करना भी।

सिर्फ अधिकार ही नहीं आज का दिन हमें हमारे कर्तव्यों के प्रति भी सजग करके इसकी याद दिलाता है। हमारा लक्ष्य केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए भी योगदान देना होना चाहिए। एक विकसित और सशक्त भारत के लिए हमें ईमानदारी, शिक्षा और परिश्रम को अपनी प्राथमिकता बनाना होगा।

आइए गणतंत्र दिवस के दिन हम संकल्प लें कि हम देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करेंगे। देश की अखंडता और एकता को बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे। अपने साथ दूसरे के अधिकारों का भी ध्यान रखेंगे।
जय हिंद-जय भारत!