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उत्तरकाशी सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को निकालने में क्यों लग रहा है इतना समय? यहां समझें पूरी बात.

 
  • Raghvendra Shukla
  • 24 Nov 2023
  • 978
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देहरादूनः उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में मजदूरों को फंसे 12 दिन बीत गए हैं। हर दिन लगता है कि आज रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो जाएगा और मजदूर बाहर आ जाएंगे लेकिन रेस्क्यू टीम और मशीनों के आगे हर बार कोई न कोई नई बाधा खड़ी हो जाती है। मजदूरों को बाहर निकालने के लिए तैयार की जा रही वैकल्पिक सुरंग के पूरा होने में सिर्फ 10 से 12 मीटर की दूरी बची है। फिर भी रेस्क्यू ऑपरेशन में 12 से 15 घंटे और लग सकते हैं। ये देरी क्यों हो रही है, आइए जानने की कोशिश करते हैं।

वजनी ऑगर मशीन

मजदूरों को निकालने के सुरंग बनाने वाली अमेरिकी ऑगर मशीन का प्‍लेटफॉर्म 25 टन वजनी है। ड्रिलिंग के दौरान बारबार सरिया की वजह से प्‍लेटफॉर्म को नुकसान पहुंच रहा है। इस वजह से भी काम रुक जाता है। 6 मीटर के पाइप को एक-दूसरे से जोड़ने में भी काफी समय लग रहा है। जोड़ने, चालू करने और उन्हें पुश करने की पूरी प्रक्रिया में 4-5 घंटे चाहिए होते हैं।

वेल्डिंग का धुआं

सुरंग में पाइप डालने के दौरान वेल्डिंग से उठने वाला धुआं टनल में जाता है, जिससे मजदूरों को परेशानी होती है। वहां ऑक्सिजन का लेवल भी काफी कम है। ऐसे में उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है। इसे ध्यान में रखकर भी काम धीरे-धीरे किया जा रहा है।

पहली बाधा

मजदूरों के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बुधवार को दोपहर 2 बजे अमेरिकी ऑगर मशीनों को पहली बाधा मिली थी। तब 45 मीटर की ड्रिलिंग हो चुकी थी। इसके बाद ऑगर मशीन को बाहर निकाल लिया गया था ताकि नई चुनौतियों के लिए उसे और व्यवस्थित किया जा सके। बाधाओं की वजह से उसके प्लैटफॉर्म को नुकसान पहुंचा था। बुधवार को 4 बजे के आसपास एनडीआरएफ ने पाइप की स्थिति देखी और पाया कि वहां आयरन रॉड्स के टुकड़े हैं, जो रास्ते में आ रहे हैं। बुधवार को ही 6 से 7 बजे के आसपास एनडीआरएफकर्मियों की टीम ने बारी-बारी से पाइप के अंदर प्रवेश किया और आयरन रॉड्स को गैस कटर से काटा।

सरिया काटने की चुनौती

तीन कोशिशों के बाद भी एनडीआरएफ कर्मी लोहे की छड़ों को नहीं काट पाए। उनके सामने अंदर कई सारी चुनौतियां थीं। जगह कम थी। गैस कटर की वजह से वहां तापमान काफी ज्यादा हो जाता था, जिससे गर्मी लगती थी। इसके अलावा पाइप के भीतर ऑक्सिजन की कमी से भी कर्मी काफी परेशान रहे। गुरुवार की रात डेढ़ बजे दो एक्सपर्ट दिल्ली से बुलाए गए। दो घंटे के लंबे ऑपरेशन के बाद उन्होंने आयरन रॉड्स की बाधा पार कर ली। साथ ही 800MM की पाइप के नुकसान को भी रिपेयर कर लिया।

अभी कितना टाइम और?

गुरुवार सुबह 11 बजे अमेरिकन ऑगर मशीनों ने फिर से ड्रिलिंग शुरू की। इसके बाद उनके सामने फिर एक बाधा आ खड़ी हुई। हालांकि, इनसे निपटते हुए टीम ने पाइप्स को मलबे में 46.8 मीटर तक फिट कर दिया। मजदूरों से सिर्फ 12 से 15 मीटर की दूरी बची है। इसके लिए कितना समय लगेगा, कहा नहीं जा सकता।

 

 
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