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मजदूरों को बाहर निकालने के लिए सिल्कयारा टनल में बिछाई जा रही है स्टील पाइप, यहां जानें हर अपडेट.

 
  • Vivek Mishra
  • 14 Nov 2023
  • 1086
image  

 

 

देहरादून: उत्तरकाशी के सिल्क्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेषज्ञों ने 900 मिमी के एमएस स्टील पाइप को मलबे के आरपार करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। सुरंग के अंददर फंसे 40 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए बचावकर्मियों ने मंगलवार को मलबे में बड़े व्यास के एमएस (माइल्ड स्टील) पाइप डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी। अधिकारियों ने यहां बताया कि सिलक्यारा सुरंग के धंसाव वाले हिस्से में क्षैतिज ड्रिलिंग कर उसमें पाइप डाले जाएंगे, ताकि उसके जरिए अंदर फंसे श्रमिक बाहर आ सकें।

सुरंग में फंसे मजदूरों से एसडीआरएफ कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने वॉकी टॉकी की जरिये की बात की। कमांडेंट ने सबका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बताया कि सभी मजदूर सुरक्षित हैं। सभी को जल्द रेस्कयू कर लिया जाएगा। पाइपलाइन के जरिये चना, बादाम, ओआरएस, ग्लूकोस और दवाइयां पहुंचाई गई हैं।

अंदर फंसे सभी 40 कर्मचारी स्‍वस्‍थ और सुरक्षित हैं, सीडीओ ने दिया बड़ा अपडेट

उत्‍तराखंड के उत्तरकाशी सुरंग हादसे में नया अपडेट आया है। सीडीओ गौरव कुमार का कहना है, 'मैं अभी टनल के अंदर गया था। मैंने अंदर फंसे कर्मचारियों से लगातार बातचीत की। वे सभी सुरक्षित और स्वस्थ हैं। खाने-पीने के सामान और पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। सीएमओ ने कुछ दवाओं की भी व्यवस्था की है। उन्हें भेजा जा रहा है। जहां तक बचाव का सवाल है, पाइप पुशिंग शुरू होने वाली है। उसके लिए प्लेटफॉर्म तैयार है। हम अपने शेड्यूल के मुताबिक प्रगति कर रहे हैं।'

उत्तरकाशी के सिल्क्यारा में निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा रविवार सुबह 5:30 बजे ढह गया था। जिसकी वजह से टनल के भीतर काम कर रहे 40 श्रमिक फंस गए। टनल में श्रमिकों के फंसे होने की सूचना पर तमाम प्रशासनिक अमला, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। मलबा हटाने का काम शुरू करने पर जब ऊपर से और मलबा गिरने लगा तो हैवी एक्सकैवेटर मशीन मंगवाई गई, जिसके बाद बचाव कार्य शुरू किया गया।

बचाव के काम में लगे अधिकारी ने दावा किया कि टीम सुरंग में 25 मीटर तक घुसने में कामयाब हो चुकी है। अभी लगभग 35 मीटर और मलबा साफ करना है। राहत और बचाव का काम दिन रात जारी है। नैशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के असिस्टेंट कमांडेंट कर्मवीर सिंह भंडारी ने बताया है कि सुरंग के अंदर फंसे सभी 40 मजदूर सुरक्षित हैं। उन्हें पानी और खाना भिजवाया गया है। मजदूरों ने वॉकी-टॉकी के जरिए बताया है कि वे सुरक्षित हैं। मशीन के जरिए कैविटी से गिर रहे मलबे को रोकने की कोशिश की जा रही है। सिल्क्यारा टनल में फंसे मजदूरों को निकालने और मलबा हटाने के लिए हैवी एक्सकेवेटर मशीनों को लगाया गया है। टनल में पानी की सप्लाई के लिए बिछी पाइपलाइन के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। खाना भी इसी पाइपलाइन के जरिए कंप्रेसर के जरिए दबाव बनाकर टनल में फंसे मजदूरों तक भेजे गए हैं। मजदूरों ने कहा है कि उन्हें खाना मिल गया है।

स्टील पाइप आरपार करने का काम शुरू हुआ

सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए एक्सपर्ट्स की टीम विभिन्न तकनीकी अमल में ला रही है। सिंचाई विभाग के पांच विशेषज्ञ अभियंता भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। विशेषज्ञों ने सभी मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए 900 एमएम के एमएस स्टील पाइप को मलबे के आरपार करने के लिए काम शुरू कर दिया है।

सीएम के दौरे के बाद और तेज हुआ कार्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के घटनास्थल के निरीक्षण के बाद सुरंग के अन्दर मलबे को युद्धस्तर पर हटाए जाने का कार्य किया जा रहा है। सुरंग की दीवार पर शॉर्टक्रेटिंग का कार्य भी किया जा रहा है। साथ ही विशेषज्ञों के परामर्श के बाद मजदूरों तक पहुंच बनाने के लिए मलबा हटाकर सेटरिंग प्लेट लगाकर एस्केप पैसेज तैयार करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

घटनास्थल के बाहर ये उपलब्ध

घटनास्थल पर स्ट्रेजिंग एरिया बनाया गया है। यहां पर ड्रिल मशीन और शॉर्ट क्रीट मशीन उपलब्ध हैं। साथ ही सुरंग के बाहर 3 पोकलैण्ड, 2 जेसीबी, 6 ट्रक, 1 हाईड्रा, 2 लोडर तैनात हैं। सुरंग के अन्दर 4 पोकलैण्ड, 3 शॉर्टक्रीटिंग मशीन 2 बूमर, 2 हाईड्रा और 2 ट्रक कार्य कर रहे हैं।

जांच के लिए टीम ने किया निरीक्षण

भूस्खलन के कर्म की जांच के लिए उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक की अध्यक्षता में तकनीकी समिति का गठन किया गया है। समिति में वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग एवं खनिकर्म इकाई और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक्सपर्टस शामिल हैं जिन्होंने आज घटनास्थल का निरीक्षण किया।

गेट पर ऐंबुलेंस तैनात

सुरंग से श्रमिकों को निकालने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम में विशेषज्ञ और उचित औषधि उपकरण ऐंबुलेंस के साथ टनल गेट पर तैनात किए गए हैं। किसी भी विपरीत परिस्थिति में कार्रवाई के लिए निकटवर्ती जनपदों के चिकित्सालयों के साथ ही एम्स ऋषिकेश को हाई एलर्ट पर रखा गया है और ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडरों का भण्डारण किया गया है।

160 राहतकर्मी तैनात

खोज और बचाव कार्यों के लिए पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, बीआरओ, स्वास्थ्य विभाग और त्वरित कार्यवाही दल के सदस्यों सहित कुल 160 राहतकर्मी घटनास्थल पर तैनात किए गए हैं, जबकि घटनास्थल से 5 किमी की दूरी पर स्यालना के पास अस्थायी हैलीपैड का निर्माण किया गया है। चिन्यालीसौड़ हैलीपैड को भी राहत कार्यों के लिए चिह्नित किया गया है।

प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए

01374-222722, 222126, 7500337269- जनपद आपातकालीन परिचालन केन्द्र
7455991223, 7818066867-सिल्क्यारा में स्थापित स्थलीय परिचालन केन्द्र

 

 
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